Friday, 3 May 2013

गीली चूत की प्यास

गीली चूत की प्यास

बूढ़े पति के बस में चुदाई करना था ही नहीं

indian village girl1 गीली चूत की प्यास
गाँव में गीली चूत की चुदाई
गरीबी के वजह से एक नारी की समस्याएँ कितनी बढ़ जाती हैं वह मुझ से ज्यादा किसे पता होगा भला. 19 साल की कली थी मैं जब मुझे 20000 रूपये की एवज में घनश्यामदास को बेचा गया था. भले लोग कहें की मेरी शादी हुई थी लेकिन उस दिन में बेचीं गई थी. घनश्यामदास चलने के काबिल तो था नहीं, वो बिस्तर में मुझे क्या खुश कर सकता था. मेरी केवल दो गलतियां थी. पहेली की मैं काली थी और दूसरी मैं गरीब घर पैदा हुई थी. बाप को शराब के पैसे कम पड़ने लगे इसलिए उसने मुझे बेच ही दिया, हाय रे नसीब. लेकिन सच बताऊँ मैं घनश्यामदास के वहाँ आ के शेठानी बन गई थी, उसके वहां पानी भी नौकर देते थे. मैंने 2 महीने तक इस बूढ़े के लंड को उठा के अपनी रोज पानी बहाती गीली चूत में लेने की कोशिश की लेकिन उसका लंड अब चुदाई के लिए सही नहीं बचा था. वोह मुश्किल से लंड चूत के अंदर घुसाता और अभी मैं चुदाई का अनुभव अपनी गीली चूत में कर सकूँ उसके पहले तो वो बह जाता था. घनश्यामदास को भी शर्म आती थी और उसने मुझे कहा की उसकी पहली पत्नी के मरने के बाद उसने इतनी मुठ मारी की उसकी यह हालत हो गई हैं. उसने मुझे अपनी चूत के लिए एक लौड़ा तलाश लेने के लिए कहा.

मनोज मुझे याद आया, मेरी गीली चूत का सहारा

मेरे दिल में कुछ दिनों से मनोज के ही ख्याल आते थे वही तो था जिसने 18 साल की होने पर मेरी गीली चूत को पहेली बार सहारा दिया था. वोह हमारे पडोस में रहेता था और उसकी उम्र मुझ से 5 साल ज्यादा थी. वोह अक्सर मुझे हमारे और उसके घर के बिच बने कोमन संडास में चोदता था और उसके लंड की मस्ती मुझे बहुत अच्छी लगती थी. वोह एक कंपनी में सामान्य नोकरी करता था और उसकी पत्नी उमा कपडे सिलाई करने का काम करती थी.मनोज उमा से ज्यादा मुझे चोदता था लेकिन मेरी शादी हो जाने से मेरे और उसके सबंध बांध हो गए थे, अभी भी मैं जब मइके जाती तो मनोज का लंड अपनी सदा गीली चूत में लेने का बहाना ढूंढती थी लेकिन अब यह सब मुश्किल हो गया था. लेकिन अब मेरे बूढ़े पति ने कह दिया था की मैं अपनी गीली चूत के लिए खुद कुछ देख लूँ तो अब रास्ता आसान हो गया था. मनोज को मैंने फिर से लुभाने के लिए घनश्यामदास से एक हफ्ते रहने जाने की अनुमति मांग ली. उसने मुझे भेज दिया. मनोज अभी मुझ से नजरे मिलाने से कतरा रहा था. मैंने अपनी परची आज भी वहीँ रखी जहाँ शादी के पहले मैं रखती थी और मनोज उसे लेके पढ़ता था. मैंने उसे रात को 2 बजे मिलने के लिए कहा था.
मैं उस दिन दोपहर को ही कुछ घंटे सो गई, और घर में अब मैं घनशयामदास की बीवी होने की वजह से मेरी इज्जत 100 गुनी बढ़ गई थी, एक जमाना था की मैं काम से फुर्सत नहीं पाती थी और अभी काम करने को कुछ था ही नहीं. रात को मैं उठी और मनोज की राह देखते हुए संडास के अंदर ही बैठी रही. दो बजे और मनोज के दरवाजे से क्दक्क्क की आवाज आई. मनोज तुरंत संडास की तरफ आ गया और अंदर आ सके इस लिए मैंने तुरंत दरवाजे की कड़ी खोल दी. वोह सीधा अंदर आ गया. मेरे से सच में रहा नहीं जा रहा था. दोपहर को मनोज को देखने के बाद से ही गीली चूत डंडा और केवल डंडा मांग रही थी. इस गीली चूत को घनशयामदास नहीं ले सका, शायद उसकी किस्मत फूटी थी. मनोज कुछ कहे उसके पहले ही मैंने उसका लंड हाथ में ले लिया और जोर से दबाने लगी. मनोज सिसकियाँ निकालने लगा और वोह मुझे बोला, “अरे तू पगला गई हे का बे, तेरे पति को पता चला तो चुनवा देंगा मुझे दिवार से री. भोसड़ी का बहुत बड़े आदमी से ब्याही तू भी, अब उमा की चूत भी फट सी गई हैं. मैं मुठ मार के दिन निकाल रहा हूँ. आज तुझे चोद देता हूँ फिर हम नहीं मिलेंगे.”
मैंने उसकी पेंट खोलते हुए कहा, “अबे मनोज तू घबराता क्यूँ हैं, सेठ का लंड गीली चूत नहीं ले पाया और उसने मुझे बहार चुदवाने की अनुमति दी हैं. उसे अपने पैसे के लिए वारिस चाहिए. मैंने तुझे उसके घर नौकरी दिलवा दूंगी. तू वहीँ रहेना, जम के चुदाई करेंगे हम लोग.” मनोज ने मेरी तरफ देखा और कहा, “सच्ची, तू मजाक तो नहीं कर रही हैं ना.” मैंने कहा, “एकदम सच्ची, अरे तू ही तो हैं जो मेरी गीली चूत को रस से भर सके.” मनोज मुझे प्यार से देख के मुझे गले पर किस करने लगा. मैंने उसके तोते को हिलाना चालू कर दिया, उसकी लुंगी मैंने कब की बातों बातों में उठा ली थी, वोह जब भी मुझे मिलने आता अंदर लंगोट नहीं डालता था. मनोज का लौड़ा पकड़ते ही मुझे अपनी गीली चूत के अंदर झुनझुनी होने लगी, मनोज मुझे जोर जोर से चूम रहा था. मुझे चोदने को मिलता रहेंगा यह सोच के वो भी बहुत उत्तेजित हो उठा था.

मनोज ठोक ठोक के मुझे पेलने लगा

मनोज ने मुझे अब निचे बिठाया और अपना लंड मेरे मुहं में दे दिया. मैं मनोज का लंड गले तक भर के चूसने लगी, मनोज मेरे बालो में अपने हाथ घुमा रहा था, उसके मुख से संतोष के आवाज आने लगे थे, आह आह ओह ओह ओहो…! मुझे भी आज बहुत दिनों के बाद कडक लंड मिला था इसलिए मुझे भी बहुत मजा आने लगा. मनोज मेरे माथे को पकड़ के मुझे जोर जोर से मुहं में चोदने लगा. मैंने अपने हाथ को चूत के उपर रखा और मैं चूत को सहलाने लगी. मनोज मुहं को चोदता ही गया, उसका लंड भी आज बहुत दिन बाद अपने छेद पाके खुश लग रहा था. मेरी गीली चूत में मैंने एक ऊँगली दे दी और मैं लंड चूसने के साथ साथ अपने हाथ से हस्तमैथुन करने लगी. मनोज और मुझे दोनों को बहुत मजा आ रहा था. मनोज की मुहं को चोदने की झडप बढ़ने लगी, उसे लंड के उपर मेरे दांत भी नहीं गड रहे थे…!

दोनों पहली बार झड गएँ

मेरे और मनोज दोनों के लिए आज बहुत मजे का दिन था और दोनों बहुत ही उत्साहित हुए थे. मनोज ने तभी एक लंबी आअह्ह्ह्ह ली और उसका सारा वीर्य मेरे मुहं में छोड़ दिया. मेरी गीली चूत में मैंने जोर जोर से ऊँगली दी और जैसे ही मुझे मनोज के वीर्य का अनुभव मुहं में हुआ मैं भी उसके साथ ही झड गई. मनोज ने अपने कान के उपर रखी बीडी निकाली और सुलगा ली. उसने जैसे ही बीडी ख़त्म की वोह चुदाई के दुसरे राउंड के लिए तैयार हो चूका था.अब की उसने अपना लंड सीधे मेरे चूत के छेद के उपर रख दिया और उसे रगड़ने लगा. मेरी चूत में वैसे भी चिकनाहट थी और उसका लंड जैसे की मेरी चूत में ही सीधा घुसने लगा. मैंने मनोज को कस के पकड़ लिया और वोह चुदाई के झटके मुझे देने लगा. मनोज के लंड से मेरी गीली चूत को असीम सुख मिलने लगा. मनोज भी मुझे कस के चुदाई का मजा देने लगा. रात का सन्नाटा चुदाई के फचफच आवाज को और भी सेक्सी बना रहा था. मनोज मुझे कमर से पकडे ऐसे ही 5 मिनिट तक ठोकता रहा.

गीली चूत में उभरा कामरस का झरना

मनोज ने मुझे अब संडास की दिवार पकड़ के खड़ा किया और वोह मुझे औरभी जोर जोर से चूत में लौड़ा देने लगा, उसका बांस जैसा लंड मेरी चूत की अंदर की दीवारों को मजा दे रहा था. मेरे मुहं से आह आह निकल रही थी और वोह मुझे अब पूरा लंड बहार निकाल के फिर पूरा लंड अंदर कर के मजे देने लगा. उसकी चुदाई की झडप बढती गई और साथ ही मेरी सिसकारियां आनंदमय होने लगी.मनोज ने तभी मुझे बताया की वोह झड़ने वाला हैं, मैंने अपनी गीली चूत को कस दी उसके लौड़े के उपर. मनोज एक आह के साथ झड़ गया. उसका सारा वीर्य मेरी चूत में निकल पड़ा. आज बहुत दिनों के बाद मेरी चूत को इस असीम सुख का अनुभव हुआ था…..!!!
मैंने घनश्यामदास को कह के मनोज को उसके वहाँ नौकरी दिला दी, अब मनोज मेरे सामने ही होता हैं और वोह अब अक्सर मेरी चुदाई यही करता हैं. उसके वीर्य से मुझे एक बच्चा हुआ हैं और सेठ भी खुश हैं क्यूंकि उसे उसके परिवार के लिए वारिस मिल गया हैं और मैं खुश हूँ क्यूंकि मुझे मेरी गीली चूत के लिए एक मजबूत लंड का आशरा मिल गया हैं.

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